नज़्म : कुछ बादल बरसते नहीं
छुपा दिया है आसमां मेरा
एक अरसे से,
घने अब्र-ए-इंतज़ारने।
एक अरसे से,
घने अब्र-ए-इंतज़ारने।
दिखते नहीं
आफ़ताब-औ-चाँद मेरे,
जो हुआ करते हो
तुम ही।
आफ़ताब-औ-चाँद मेरे,
जो हुआ करते हो
तुम ही।
बरस जाये बादल में से
पानी मुलाक़ात का,
तो
वस्ल हो जाये।
पानी मुलाक़ात का,
तो
वस्ल हो जाये।
रूतूबतें जितनी ज़्यादा बढ़ती हैं;
कहते हैं,
अब्रों के बरसने के आसार
उतने ही ज़्यादा बढ़ जाते हैं।
कहते हैं,
अब्रों के बरसने के आसार
उतने ही ज़्यादा बढ़ जाते हैं।
बढ़ा दी हैं रूतूबतें
हमारी फ़ुर्क़तों की,
घने बादलोंने यहाँ।
हमारी फ़ुर्क़तों की,
घने बादलोंने यहाँ।
मैं गिला सा नज़र आता हूँ
अब तर-ब-तर।
हाँ, भीगा हुआ,
क्यूँकि,
अब तर-ब-तर।
हाँ, भीगा हुआ,
क्यूँकि,
कुछ बादल
बरसते नहीं
और रूतूबतें ज़्यादा
भिगो दिया करती हैं अक्सर।
बरसते नहीं
और रूतूबतें ज़्यादा
भिगो दिया करती हैं अक्सर।
© अर्पण क्रिस्टी
रूतूबतें = humidity
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