नज़्म : मैंने कहा तो था कि | Nazm : Maine kaha to tha ki | Arpan Christy | अर्पण क्रिस्टी
मैंने कहा तो था कि,
भूलूँगा नहीं मैं तुम्हें।
लेकिन...
आज अचानक याद आया
कि,
तुम्हारी याद आये
एक अरसा बीत गया।
तुम्हारी आवाज़ के फोटो
खिंच रखे थे मैंने,
और रिकॉर्ड कर लिया था
तुम्हारी बूद के कई लम्हों को।
उन फोटो को बार बार देखना
और वह रिकॉर्ड,
जो घुल जाती थी मेरे सुकून के लम्हों के कानों में,
वो मामूल भी अब तो नहीं रहा।
अक्सर तुम्हारे ख़यालों की ऊँगलियाँ
मेरे ख़यालों पर
भूलूँगा नहीं मैं तुम्हें।
लेकिन...
आज अचानक याद आया
कि,
तुम्हारी याद आये
एक अरसा बीत गया।
तुम्हारी आवाज़ के फोटो
खिंच रखे थे मैंने,
और रिकॉर्ड कर लिया था
तुम्हारी बूद के कई लम्हों को।
उन फोटो को बार बार देखना
और वह रिकॉर्ड,
जो घुल जाती थी मेरे सुकून के लम्हों के कानों में,
वो मामूल भी अब तो नहीं रहा।
अक्सर तुम्हारे ख़यालों की ऊँगलियाँ
मेरे ख़यालों पर
नाम लिख जाया करती थी तुम्हारा,
जैसे नमी जमी हुई खिड़की पर
कोई ऊँगली से कुछ लिख देता हो।
अब दस्तक नहीं देती वो ऊँगलियाँ
मेरी फुर्सत के दरवाज़े पर।
बहुत वक़्त गुज़र चूका,
तुम्हारी मौजूदगी का एहसास
लिपटा नहीं मुझ से।
मैंने कहा तो था कि,
भूलूँगा नहीं मैं तुम्हें।
लेकिन...
-अर्पण क्रिस्टी
बूद = existence
जैसे नमी जमी हुई खिड़की पर
कोई ऊँगली से कुछ लिख देता हो।
अब दस्तक नहीं देती वो ऊँगलियाँ
मेरी फुर्सत के दरवाज़े पर।
बहुत वक़्त गुज़र चूका,
तुम्हारी मौजूदगी का एहसास
लिपटा नहीं मुझ से।
मैंने कहा तो था कि,
भूलूँगा नहीं मैं तुम्हें।
लेकिन...
-अर्पण क्रिस्टी
बूद = existence

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