नज़्म :: एक्सपायरी डेट | Nazm :: Expiry Date

तुम अक्सर
आगाह किया करते थे मुझे कि
मैं "एक्सपायरी डेट" पढ़ लिया करूँ
कुछ भी इस्तेमाल करने से पहले।

और मैं वही बेफ़िक्रे अंदाज़ में कहता कि,
होनी ही नहीं चाहिए "एक्सपायरी डेट"।
क्योंकि मुझे आदत थी कि
मैं उसे ही पास रखता जो मुझे प्यारा होता
और जिसकी मुझे ज़रूरत होती।
वैसे में कहाँ देखा करता "एक्सपायरी डेट" मैं?

जब से "एक्सपायरी डेट" बीत गई है
हमारे साथ की,
कोई मुझे अब आगाह नहीं करता।
लेकिन अब मैं रोज़ देख लिया करता हूँ
"एक्सपायरी डेट" तुम्हारे आने की
उम्मीद की।
लेकिन दिखती नहीं कोई भी तारीख़
उस पर।

तुमने बताया नहीं था कभी भी कि
उम्मीदों की "एक्सपायरी डेट"
होती नहीं !...

- अर्पण क्रिस्टी

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