Gazal recitation | Wo jhulaste ghar men khud ko jhonktaa hai | वो झुलसते घर में ख़ुद को झोंकता है

Gazhal recitation :


वो झुलसते घर में ख़ुद को झोंकता है,
ख़त पुराना है मगर वो खोलता है।

इस कदर मैं छोड़ता हूँ याद तेरी,
रोज़ ज्यूँ सिगरेट कोई छोड़ता है।

- अर्पण क्रिस्टी

Courtesy : Flashback Stories

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